पालतू जीवों के टीकाकरण आवश्यकता पर डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम

एनआईटी तीन स्थित डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के सहयोग से जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं समाज को जूनोटिक यानि विभिन्न जीवों से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों के प्रति टीकाकरण की आवश्यकता को समझाया गया। महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जूनोटिक रोगों की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता, वैज्ञानिक सोच तथा सामुदायिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य अतिथि प्रो. राकेश त्यागी, स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य का आपसी संबंध ही ‘वन हेल्थ’ की आधारशिला है तथा सभी के संयुक्त प्रयासों से ही भविष्य में उभरने वाली संक्रामक बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। एम्स, नई दिल्ली के रामालिंगास्वामी फेलो डॉ. मैनपाल राणा ने अत्यंत सरल एवं रोचक शैली में रेबीज, एवियन इन्फ्लुएंजा, ब्रुसेलोसिस तथा लेप्टोस्पायरोसिस जैसे जूनोटिक रोगों के कारण, संक्रमण के मार्ग एवं बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में स्वच्छता, पशुओं के नियमित टीकाकरण, सुरक्षित खाद्य आदतों तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। एम्स, नई दिल्ली के ही डॉ. विक्रम सैनी ने ऑनलाइन व्याख्यान के माध्यम से संक्रमण जीवविज्ञान, अनुसंधान एवं जूनोटिक रोगों की रोकथाम में वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डाला। इनके साथ ही कार्यक्रम में शामिल कृति नेगी, शालिनी शर्मा तथा स्निग्धा भट्टाचार्जी ने भी अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर जे. सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के यूथ रेड क्रॉस (YRC) समन्वयक डॉ. नविश कटारिया ने कहा कि आज के युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना जनस्वास्थ्य से जुड़े अभियानों को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने जूनोटिक रोगों के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने स्वच्छता, सुरक्षित जीवनशैली, पशुओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार तथा ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. कटारिया ने कहा कि युवाओं की सकारात्मक सोच और सामाजिक भागीदारी भविष्य में संक्रामक रोगों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उनके प्रेरणादायी विचारों एवं उत्साहवर्धक संबोधन ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सामुदायिक सेवा के प्रति सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर भाषण, नारा लेखन एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 60 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में अंशु ने प्रथम, शिवम ने द्वितीय तथा याशिका त्यागी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में कशिश प्रथम, वंश राव द्वितीय तथा जगप्रीत सिंह तृतीय स्थान पर रहे। वहीं नारा लेखन प्रतियोगिता में पायल सती ने प्रथम, सुखमनी ने द्वितीय तथा अर्पिता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन संयोजक डॉ. जितेन्द्र ढुल, ओमिता जौहर, कविता शर्मा एवं डॉ. राजकुमारी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अमित शर्मा एवं कर्मण्य रहे, जबकि आयोजन सचिव रितु, गौतम एवं ट्विंकल ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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