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मशहूर कलाकार गजेंद्र फोगाट ने ओएसडी विशेष प्रचार प्रकोष्ठ का संभाला कार्यभार

चंडीगढ़(विनोद वैष्णव )। हरियाणा के मशहूर कलाकार एवं राज्य सरकार के विशेष प्रचार प्रकोष्ठ के नवनियुक्त ओएसडी गजेंद्र फोगाट ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया हैं। फोगाट ने हरियाणा सरकार द्वारा नई जिम्मेदारी देने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार प्रकट किया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करने तथा खेल कला व हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने के इरादे जाहिर किए।
गजेंद्र फोगाट ने कहा कि जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उन्हें दी हैं वे उसे पूरी निष्ठा एवं लगन के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता रहेगी कि प्रदेश की नई-नई जनकल्याणकारी योजनाओं को सोशल प्लेटफॉर्मों पर जन संदेश के रूप में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएंगे ताकि प्रदेशवासी उन योजनाओं से लाभान्वित हो। फोगाट ने कहा कि वे शुरू से ही अपने गीतों के जरिये समाजिक संदेश देने का कार्य करते हुए आ रहे है। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ हरियाणा की खेल कला व हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा और हरियाणवी कलाकारों, खिलाड़ियों की मदद करने के लिए वे हमेशा तत्पर रहकर अपना विशेष योगदान देंगे। गजेंद्र फोगाट ने कहा कि हरियाण सरकार भी प्रदेश के कलाकारों की मदद के लिए आगे रहती है। कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के दौरान सरकार ने प्रदेश के कलाकारों को सहायता राशि प्रदान की जो कि सराहनीय है। उन्होंने कहा कि खेल कला हेतू वे आगामी हरियाणा में होने वाले चौथे खेलो इंडिया यूथ गेम में प्रदेश के युवा खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करने का कार्य करेंगे।

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पूर्व उद्योग मंत्री विपुल गोयल के द्वारा फिल्म कागज दिखा कर दिया गया जनता को एक नया संदेश

फरीदाबाद (एसपी सिंह/बिजेन्दर सिंह )। उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने अपने कार्यालय के बाहर एक डिजिटल थिएटर लगाकर रिलीज हुई नई फिल्म कागज को डिजिटल पर्दे पर थिएटर के रूप में लोगों को निशुल्क दिखाया।विपुल गोयल ने कहा कि यह फिल्म सभी समाज के लोगों को एक संदेश देती है कि किस प्रकार किसी भी छोटी सी गलती के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है परंतु एक संघर्ष के द्वारा हिम्मत ना हार कर हर परेशानी को दूर किया जा सकता है इस फिल्म में भी यही संदेश दिया गया है कि हमारे सिस्टम की एक छोटी सी गलती से एक जीवित इंसान को मृत दिखा दिया गया और वह इस लड़ाई को जीतने में सफल रहा और सिस्टम ने उस गलती को ठीक भी किया। इस फिल्म को दिखाने के प्रति उनका उद्देश्य है पिछले काफी समय से लोग अपने अपने घरों में कोरोना महामारी के कारण पिछले 8 महीनों से घरों में हैं और कहीं भी निकलना नहीं हो पा रहा। इस थिएटर में काफी लोगों ने फिल्म का आनंद लिया, जोकि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठकर लोगों ने और बच्चों ने फिल्म को देखा।विपुल गोयल ने कहा कि यह एक नई शुरुआत है इस तरह के छोटे थिएटर से गांव-गांव और कस्बे भी शहरी क्षेत्रों की तर्ज पर सिनेमाघर मैं फिल्म देखने जैसा अनुभव कर पाएंगे।लोगों ने उनकी इस नई शुरुआत को काफी सराहा और कहा कि विपुल गोयल इस तरीके के नए नये कांसेप्ट करने के लिए ही विख्यात है फिर चाहे फरीदाबाद के अंदर न जाने कितने ऐसे अनगिनत कार्य किए जो औरों के लिए आज भी मिसाल है जैसे कि फरीदाबाद शहर में लगा एशिया का सबसे बड़ा तिरंगा झंडा और दूसरे देश की तर्ज पर बने टाउन पार्क में फूलों की घड़ी व् इसके अतिरिक्त और भी न जाने कितने कार्य हैं जो विपुल गोयल ने इस शहर में शुरू किए। जिनके बारे में लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था । लोगों ने विपुल गोयल की प्रशंसा की और धन्यवाद दिया कि उन्हें अपने घर की तरह फिल्म दिखाने का उन्होंने प्रयास किया जोकि बहुत अच्छा लगा।

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एमवीएन विश्वविद्यालय पलवल में पंचम दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया

एमवीएन विश्वविद्यालय पलवल में पंचम दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया

पलवल (विनोद वैष्णव ) | एमवीएन विश्वविद्यालय पलवल में पंचम दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया जिस के मुख्य अतिथि संतोष शर्मा कुलाधिपति एमवीएन विश्वविद्यालय ने मेधावी छात्र एव छात्राओं को उपाधि प्रदान की I इस अवसर पर 10 अनुसंधान विद्वानों (माला यादव, मोहित संदूजा, विकास जोगपाल, मधु खन्ना, रितु सचदेवा, अमित कुमार, पूजा शर्मा, संगीता सिंह, कमल गुप्ता, विनय कुमार सैनी) को विद्या चिकित्सक की उपाधि प्रदान की गई एवं अन्य 424 मेधावी छात्र एवं छात्राओं को अभियांत्रिकी, प्रबंधन, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, कंप्यूटर अनुप्रयोग एवं फार्मेसी आदि संकायो की उपाधि प्रदान की गई I दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि संतोष शर्मा द्वारा शैक्षणिक उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 3 छात्रों (राहुल जैन, विकास शर्मा एवं निशा) को स्वर्ण पदक एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया I
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष वरुण शर्मा ने विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एमवीएन विश्वविद्यालय की शुरुआत एमवीएन सोसाइटी के संस्थापक स्वर्गीय गोपाल शर्मा जी के जिस सपने को लेकर हुई थी वह धीरे-धीरे साकार हो रहा है I उन्होंने कहा कि एमवीएन विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेकों विद्यार्थी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय कंपनियों एवं बिजनेस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं I उन्होंने भविष्य में सफलता का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि हम जिस कंपनी के लिए भी काम करते हैं उसके लिए निष्ठावान रहे क्योंकि कंपनी की तरक्की में ही हमारी तरक्की है I
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ जेवी देसाई ने कहा कि कोरोना सर्वव्यापी महामारी के समय में भी एमवीएन विश्वविद्यालय ने समय पर पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रक्रिया को पूरा किया ताकि विद्यार्थियों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके I उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की परिस्थिति में समय-समय पर विश्वविद्यालय ने अनेकों वेबीनार कराए जिनका विद्यार्थियों को बहुत लाभ हुआ I उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले सत्र में 5 स्नातकोत्तर कोर्स मास्टर ऑफ साइंस एग्रीकल्चर, मास्टर ऑफ साइंस हॉर्टिकल्चर, मास्टर ऑफ साइंस मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, मास्टर इन फार्मेसी, मास्टर इन एमएलटी एवं कई स्नातक कोर्स प्रस्तावित है I विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ राजीव रतन ने अंत में सभी का धन्यवाद किया I इस अवसर पर जेपी गौर, सीता कालरा एवं समस्त विभागों के विभागाध्यक्ष डॉ सचिन गुप्ता, डॉ एनपी सिंह, डॉ मुकेश सैनी, डॉ राहुल वार्ष्णेय, डॉ तरुण विरमानी, डॉ कुलदीप, देवेश भटनागर, बबीता यादव, दया शंकर प्रसाद, योगेश सिंह, महेश धानु, संजय शर्मा एवं समस्त अध्यापक गण उपस्थित रहे I

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फौगाट पब्लिक स्कूल को मिला माइक्रो इनोवेशन अवॉर्ड

फौगाट पब्लिक स्कूल को मिला माइक्रो इनोवेशन अवॉर्ड

फरीदाबाद/अम्बाला (विनोद वैष्णव )।बल्लभगढ़ के समयपुर रोड राजीव कॉलोनी स्थित फौगाट पब्लिक स्कूल को शिक्षा के क्षेत्र में माइक्रो इनोवेशन अवॉर्ड प्राप्त हुआ है। यह अवॉर्ड नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) ने उन्हें अंबाला में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया। जिसे स्कूल के निदेशक डॉ सतीश फौगाट एवं प्रिंसिपल निकेता सिंह ने संयुक्त रूप से प्राप्त किया।अंबाला स्थित किंगफिशर टूरिस्ट केंद्र पर निसा ने अपने राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा की। अवॉर्ड देते हुए निसा के अध्यक्ष डॉ कुलभूषण शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में संस्था के ऐप के जरिए उन्होंने विभिन्न श्रेणियों में प्रविष्टियां मांगी थीं। जिसमें माइक्रो इनोवेशन श्रेणी में फौगाट पब्लिक स्कूल विजेता रहा है। शर्मा ने बताया कि फौगाट स्कूल में एक यज्ञशाला की स्थापना की गई है जहां प्रतिदिन हवन होता है। इस हवन में संबंधित दिन जन्मदिन वाले छात्रों के साथ हवन किया जाता है और उन्हें याद के लिए तोहफा भी दिया जाता है। इस प्रकार इस स्कूल ने बच्चों में संस्कार और मानव जाति पर कल्याण के लिए हवन को माध्यम बनाया है। यह स्कूल की दूरंदेशी है।अवॉर्ड लेते हुए स्कूल के निदेशक डॉ सतीश फौगाट ने कहा कि उनके स्कूल में शुभसमय वैदिक यज्ञशाला के नाम से वास्तव में एक संस्कारशाला बनाई गई है जिसके बहुत अच्छे नतीजे निकलकर सामने आए हैं। इस यज्ञशाला के द्वारा न केवल बच्चे संस्कृति से जुड़ रहे हैं बल्कि गौ घृत से होने वाले इस हवन से आसपास का वातावरण भी विषाणुरहित, रोगमुक्त हो रहा है।
इस अवसर पर निसा के खजांची प्रेमचंद देशवाल, सुशील गुप्ता, माता हरकी देवी स्कूल की प्रिंसिपल, नवराज फौगाट आदि मौजूद रहे।

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फैशन के बदलते दौर में लहंगा बना लड़कियो की पहली पसंद

फरीदाबाद (ख्याति वर्मा /ऋतू चौहान ) | यूँ तो हम सभी जानते है कि आए दिन लड़कियों के कपड़ो का फैशन बदलता रहता है, कभी बाजार में डांगरी का फैशन तो कभी जीन्स टॉप और प्लाज़ो सूट का फैशन देखने को मिलता है. बाजार में चाहे कितने ही तरह के फैशन क्यों न आ जाए परन्तु लहंगे का स्थान कोई भी फैशन नहीं ले सकता है क्योकि इसकी अपनी ही एक अलग पहचान है, इतना ही नहीं लड़कियां रोजमर्रा की जिंदगी में भी लहंगे को एक अलग तरह के कंट्रास्ट के साथ पहनना पसंद करती है जो वाकई में ही उनकी पर्सनॅलिटी को आकर्षित बनाता हैं.

पहले लड़कियों की विचारधारा थी की वह अपनी ही शादी में लहंगा पहन सकती है क्योंकी उन्हें लगता था की लहंगा सिर्फ दुल्हन के लिए ही बना है. लेकिन ऐसा नहीं है! बदलते समय के साथ-साथ लहंगे के डिज़ाइनस में काफी बदलाव आया है- अब हम लहंगे को किसी भी त्यौहार, जन्मदिन, फेयरवेल पार्टी, स्कूल व कॉलेज में होने वाले एनुअल फंक्शन आदि जगहों पर भी आसानी से पहन सकते है.
आइए जानते है की लहंगे के फैशन में क्या- क्या बदलाव आए अगर बात करे पहले के जमाने की तो उस समय पूरा ही लहंगा एक रंग का होता था जैसे लाल रंग का घाघरा, चुन्नी, चोली और यह सारे लेहंगे सितारे मोतियों से जड़े होते थे.अगर बात करे कढ़ाई वाले लहंगे की तो उस पुरे लहंगे में ही कढ़ाई होती थी जो दिखने में बहुत ही भारी भरकम सा लगता था लेकिन अब लहंगे के फैशन में इतना बदलाव आया है की लहंगे के रंग के साथ साथ उनके पहनने का तरीका ही बदल गया है, अब लड़कियां लहंगे के साथ चोली न पहनकर शर्ट पहनना पसंद करती है जो उन्हें एकदम परफेक्ट पार्टी होस्ट या गेस्ट वाला लुक देता है जो दिखने में काफी मॉडर्न लगता है और इसका क्रेज दिन प्रतिदिन इतना बढ़ता चला जा रहा है की बड़ी बड़ी बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका,आलिया और अनुष्का शर्मा भी इस लुक को अपना रही है। यह इतने साधारण वह सुन्दर होते है की इन्हे हर उम्र की लड़कियां एवं औरते पहनना पसंद करती है। इन लहंगो को बनाने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के कपड़ो का प्रयोग किया जाता है जैसे- बनारसी, रेशमी, जयपुरी, वेलवेट, जॉर्जेट, टाफ्ता और रॉ सिल्क आदि।
अगर आप भी किसी फंक्शन या पार्टी में परफेक्ट पार्टी होस्ट वाला लुक चाहती है तो आप इस प्रकार के लहंगे भी खरीद सकती है जैसे-
*जैकेट लहंगा
*पैनल लेंथ लहंगा
*कलीदार लहंगा
*स्ट्रैट कट लहंगा
*ए लाइन लहंगा

Posted by: | Posted on: 10 months ago

कोरोना काल के दौरान लोगो में बढ़ा आकर्षित मास्क का प्रचलन

कोरोना काल के दौरान लोगो में बढ़ा आकर्षित मास्क का प्रचलन

फरीदाबाद (ख्याति वर्मा /ऋतू चौहान ) | वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने लोगो के जीने का सलीका ही बदल दिया है इस महामारी की वजह से भारत में रहने वाले सभी निम्न व उच्च वर्ग के लोगो को इसने  घरो में रहने के लिए मजबूर कर दिया था जिसकी वजह से लोगो को काफी परेशानियो का सामना करना पड़ा! विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया है कोरोना  वायरस बहुत ही सूक्षम (छोटा ) होता है  लेकिन इसका प्रभाव बहुत ही भयंकर है, इतना  भयंकर की इसके संक्रमण में आने से मृत्यु भी हो सकती है इस बीमारी के लक्षण है- खांसी, जुखाम, छींक और सांस लेने में परेशानी आदि है इन्ही कोरोना वायरस के लक्षणों  से बचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन व स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ दिशा निर्देश  जारी किए  है जिसमे सबसे महत्वपूर्ण है- मास्क एवं हैण्ड  सेनीटाइज़र का प्रयोग एक वक्त था जब लोग वायरस से  बचने के लिए किसी भी प्रकार के मास्क का प्रयोग करते थे चाहे वह कपड़े
का मास्क हो या घर पर बनाया गया परंतु इस कोरोना वायरस बीमारी की अवधि इतनी बढ़ गई की इसका स्वरूप ही बदल गया बाजार में नए -नए प्रकार के व ब्रैंडिड मास्क बिकने लगे है! उदहारण  के तौर पर आपको बताते है की शादियों में किस प्रकार के मास्क का प्रयोग किया जा रहा है मान लो अगर हल्दी की रस्म है तो उसके लिए पीले रंग का मास्क है और अगर मेहंदी की रस्म है तो उसके लिए हरे रंग के मास्क का प्रयोग किया जा रहा है, दुल्हन शादी
में अपने लहंगे से मैचिंग ब्राइडल मास्क का प्रयोग करती है जो बहुत ही सुंदर व आकर्षित लगते  है, व्यापारिक क्षेत्र में लोग अपनी ड्रेस कोड के हिसाब से मास्क का प्रयोग करते है! इसके आलावा बाजार में विभिन्न प्रकार के मास्क उपलब्ध है जैसे-
चिल्ड्रन प्रिंट
एनिमल प्रिंट
फ्लोरल प्रिंट
एथनिक प्रिंट
कलमकारी प्रिंट
पटोला प्रिंट आदि

निष्कर्ष
लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से आकर्षित मास्क का प्रयोग तो करे ही लेकिन सामाजिक
दूरी का पालन भी आवश्य करे! 

Posted by: | Posted on: August 18, 2020

विधायक नरेंद्र गुप्ता के बेटे ने पार्क से उखड़वाए ट्री गार्ड, ऑडियो वायरल

फरीदाबाद(विनोद वैष्णव)| मॉनसून के मौसम में हॉर्टिकल्चर विभाग जगह-जगह खुदाई कर पौधे लगाने का काम कर रहा है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके। लेकिन जिले के सेक्टर 11 बी ब्लॉक के पार्क में पौधों पर लगे ट्री गार्डों को फरीदाबाद विधायक नरेंद्र गुप्ता के बेटे नितिन गुप्ता ने निगम कर्मचारियों को आदेश देकर उखड़वा लिया। दरअसल सेक्टर 11 में विधायक नरेंद्र गुप्ता ने अपना नया कार्यालय बनवाया है। मथुरा रोड से जहां से विधायक के कार्यालय वाली सड़क शुरु होती है। वहीं विधायक के बेटे ने पौधे लगा उनपर ट्री गार्ड पार्क से उखाड़कर लगाने का आदेश निगम कर्मचारियों को दे दिया ताकी उनके कार्यालय के रास्ते की सुंदरता बढ़ सके। लेकिन सेक्टरवासियों को विधायक के बेटे का ये कार्य रास नहीं आया। उनके अनुसार वो नए ट्री गार्ड भी निगम के बजट से लगवा सकते थे। सेक्टर 11 निवासी फूल चंद शर्मा ने बताया कि हमने सालों की कड़ी मेहनत के बाद इस पार्क को बनवाया है। पूर्व पर्यावरण मंत्री विपुल गोयल ने सीएम अनाउंसमेंट के तहत इस पार्क के निर्माण कार्य को शुरु करवाया था। लेकिन इस पार्क की बाउंड्री बनाने का कार्य निगम सही से पूरा नहीं कर सकी। न ही पार्क के साथ उस समय पास हुई सडक का निर्माण कार्य किया गया। फूलचंद बताते हैं कि पार्क में बाउंड्री न होने के कारण यहां आवारा पशु आकर पौधों को चट कर जाते हैं। मुजेसर से रोजाना पशुपालक मथुरा रोड पार कर अपने पशुओं को चराणे के लिए सेक्टर के इसी पार्क में लाते हैं। हमने बामुश्किल निगम से यहां ट्री गार्ड लगवाए थे ताकि पौधों की रक्षा हो सके। लेकिन मंगलवार सुबह पार्क में ये पौधों से ट्री गार्ड गायब मिले। इस बीच निगम कर्मचारी रामलाल जो सेक्टर सात निगम के नर्सरी स्टोर में बैठते हैं कि एक ऑडियो वायरल हो रही है, जिसमें वो बता रहा है कि हमने विधायक के बेटे नितिन को इस बारे में जानकारी दी थी कि वहां पार्क में ठीक तरह से बाउंड्री नहीं है। लेकिन उन्होंने इन्हें उखाड़कर सडक पर लगाने का आदेश दे दिया है और वो इस संबध में कुछ नहीं कर सकते।

Posted by: | Posted on: August 6, 2020

फरीदाबाद के फिक्की के चैयरमेन एवं प्रसिद्ध उधोगपति,परफेक्ट ब्रेड के के डायरेक्टर एच के बत्रा की पत्नी ने अपने घर को दिये से रोशन कर दिवाली जैसा माहौल बनाया एवं जय श्री राम के जयकारे लगाए

फरीदाबाद (विनोद वैष्णव ) | फरीदाबाद के फिक्की के चैयरमेन एवं प्रसिद्ध उधोगपति,परफेक्ट ब्रेड के के डायरेक्टर एच के बत्रा की पत्नी ने अपने घर को दिये से रोशन कर दिवाली जैसा माहौल बनाया एवं जय श्री राम के जयकारे लगाए |

अयोध्या में प्रभु राम के मंदिर निर्माण के लिए बुधवार को जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन किया,उसके साथ ही फरीदाबाद शहर में भी उल्लास छा गया । औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में भी बुधबार शाम को सभी ने घी के दिए जलाये । मंदिरों के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए भले ही कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासनिक आदेश से बंद हों, पर इसकी बाह्य व भीतरी साज-सज्जा पर तो कोई असर नहीं है। इसलिए मंदिरों को बिजली एवं दियो की रोशनी से सजाया गया है। भगवान राम परिवार की प्रतिमाओं के लिए नए वस्त्र पहनाये गये । घर -घर दीपावली जैसी चमक रही |

Posted by: | Posted on: August 6, 2020

हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दे सरकार : हाइफा

फरीदाबाद(विनोद वैष्णव )। हरियाणवी इनोवेटिव फिल्म एसोसिएशन (हाइफा) ने मनोहर सरकार से प्रदेश में हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा देने की मांग की है। हाइफा के अध्यक्ष वरिष्ठ फिल्म अभिनेता जनार्दन शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में देशभर में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति में प्राइमरी तक मातृ भाषा या स्थानीय बोली में शिक्षा प्रदान करने की बात कही गई है। एसोसिएशन के जिला फरीदाबाद कोर्डिनेटर कुलदीप सिंह ने बताया कि हरियाणा के गठन के समय से ही यहां के लोग हरियाणवी बोली को राजकीय भाषा के रूप में मान्यता देने की गुहार लगाते रहे हैं। बोली को मान्यता न होने से प्रदेश के कलाकारों को आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों पर तवज्जो नहीं मिल पा रही है। अगर हरियाणवी को भाषा का दर्जा मिलता है तो यहां की कला-संस्कृति का बेहतर तरीके से विकास होगा और इसे विश्वभर में पहचान मिल पाएगी। फिल्म स्टार यशपाल शर्मा, निर्देशक संदीप शर्मा, कोरियोग्राफर लीला सैनी ने कहा कि हाइफा के एजेंडे में भी हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलवाने और स्कूली स्तर पर अभिनय का विषय पाठ्यक्रम में शामिल करवाने की बात शामिल है। कुलदीप सिंह ने बताया कि एसोसिएशन के पास हरियाणवी बोली की लिपि संबंधी पूरी रूपरेखा तैयार है, जिसे अभिनेता-लेखक राजू मान एवं कवि-साहित्यकार वी.एम. बेचैन ने संग्रह किया हुआ है। अगर सरकार चाहे तो हरियाणवी बोली के मसौदे के लिए कोई आयोग गठित किया जा सकता है। इसके लिए उनकी एसोसिएशन पूर्ण रूप से साथ है।

Posted by: | Posted on: July 27, 2020

श्री वृन्दावन धाम – “श्री गोपेश्वर महादेव” (Gopeshwar Temple )

श्री वृन्दावन धाम – “श्री गोपेश्वर महादेव

जैसा कि आज २७ जुलाई २०२० को श्रावण सोमवार है तो बस मेरे मन में इच्छा जाएगी की मैं वृन्दावन स्थित श्री गोपेश्वर महादेव ,जो श्री वृन्दावन धाम में स्थित हैं के बारे में कुछ विशेष जानकारी दूँ।

कहते हैं की सम्पूर्ण विश्व में सिर्फ यही एक ऐसा विश्व प्रसिद्ध मंदिर है जहाँ श्री शिव ने एक गोपी का रूप धारण करके श्री कृष्ण के महारास में प्रवेश किया था , क्युकि उस महारास में श्री कृष्ण के अलावा किसी और पुरुष का प्रवेश वर्जित था। शिव का यह दुर्लभ स्वरुप वृन्दावन के अलावा किसी और स्थान पर नहीं मिलेगा। वृन्दावन की दिव्य भूमि पर पहुँचते ही व्यक्ति जिस आनन्द ,प्रेम उन्माद और आध्यात्मिक गहराई में डूब जाता है शायद उसका वर्णन शब्दों में कर पाना संभव नही है।दिव्य श्री कृष्ण का स्वरूप वृन्दावन में पूर्णतम ,मथुरा में पूर्णतर और द्वारका में पूर्ण है और ब्रजधाम माधुर्य की पराकाष्ठा है। भगवान श्री कृष्ण का गोपियों के साथ महारास एक ऐसा महत्वपूर्ण अवसर है जिसकी चर्चा वेदों ,पुराणों और शास्त्रों में भी वर्णित है भगवान शिव को भी महारास के दर्शनों की इतनी गहरी लालसा थी की ब्रजधाम की शक्ति ,दिव्यता और श्री कृष्ण प्रेम उन्हें भी ब्रजधाम खींच लाया। भगवान श्री कृष्ण का गोपी रूप धारण किया हुआ दुर्लभ स्वरुप शायद ही वृन्दावन के अलावा ,विश्व में कहीं भी इसका उल्लेख मिलेगा। श्री मद्भागवत में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है की जब रासलीला करने की अभिलाषा से श्री कृष्ण ने वेणुवादन आरम्भ किया तो भगवान शिव को भी इस अद्भुत दैवीय दृश्य को देखने की इच्छा और लालसा जागी और इस अभिलाषा से वो श्री वृन्दावन धाम को चले आये।

एक तरफ श्रीकृष्ण के महारास के दर्शनों की लालसा में उनका गोपीरूप धारण करना और दूसरी तरफ वृन्दावन के कोतवाल हैं। श्री मद्भागवत में उल्लेख है जब रास करने की अभिलाषा से श्रीकृष्ण ने वेणु-वादन आरम्भ किया तो उसके स्वर को सुनकर भोलेनाथ भी प्रभु के रास-दर्शन की अभिलाषा में वृन्दावन आ पहुंचे। सखियों ने उन्हें रोकते हुए कहा यहाँ पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। रास में प्रवेश का अधिकार केवल गोपियों को हैं। यह सुनकर भोलेनाथ ने तत्काल गोपी वेश धारण किया और बन गए गोपेश्वर।

इसकी विस्तृत चर्चा आने वाले समय में मैं अपनी पुस्तक में करुँगी।

श्री हितवृंदावंने श्री गोपेश्वर महादेव को वृन्दावन धाम का रक्षक मन।

सम्वत १८१७ की रचना ” हरिकला बेलि ” में उन्होंने अब्दाली के द्वारा किये हुए हमले की चर्चा करते हुए श्री वृन्दावन धाम में गोपेश्वर महादेव, मथुरा के भूतेश्वर, और गोवर्धन के चकलेश्वर का भी वर्णन किया है। कहते हैं श्रीकृष्ण की इस पावन लीला के बाद उनके प्रपौत्र वज्रनाथ ने इन्हे खोजकर वंशीवट के समीप स्थापित किया। तभी से गोपेश्वर महादेव यहाँ भक्तों को दर्शन लाभ दे रहे हैं।यहाँ साधकों ने इन्हे इस पवित्र वन के कोतवाल की संज्ञा दी है जिनके दरबार में हाजिरी के बिना ब्रजयात्रा पूर्ण नहीं मणि जाती है- “नाम विदित गोपेश्वर जिनकौ, ते वृंदा कानन कुतवार। “

व्रज में वैष्णवों का शिव के साथ समन्वय अद्धभुत है। महाप्रभु चैतन्य की परम्परा के अंतर्गत रूप गोस्वामीजी ने आज से ४८५ साल पहले संवत १५८९ में अपनी संस्कृत रचना “विदग्ध माधव” नाटक रूप में गोपेश्वर महादेव के पौराणिक महत्व का उल्लेख किया। बल्ल्भ कुल के गोस्वामी विठ्ठलनाथ जी की वि. सं. १६०० की ब्रजयात्रा में वंशीवट के समीप गोपेश्वर का उल्लेख किया है। सुकवि जगतनंद संवत १६२४ में गुंसाईं जी की दूसरी वन यात्रा के दौरान जहाँ व्रज के आठ प्रसिद्ध महादेवों में गोपेश्वर का उल्लेख किया, वहीं उनकी ‘व्रज ग्राम वर्णन’ रचना में भी इसकी जानकारी मिलती है।

श्री वृन्दावन धाम – “श्री गोपेश्वर महादेव

राधा बल्ल्भ संप्रदाय के चाचा हित वृन्दावन ने वन का रक्षक गोपेश्वर को मन। संवत १८१७ की रचना ‘हरिकला बेली’ में उन्होंने अब्दाली के द्वारा किये गए हमले की दुहाई देते हुए वृन्दावन के रक्षक गोपेश्वर से प्रार्थना करने के साथ ही मथुरा के भूतेश्वर तथा गोवर्धन के चकलेश्वर का भी उल्लेख किया है- “वन रक्षगोपेसुर पुरी रक्ष भूतनाथ, गिरी की तरहटी चक्रेसुर रक्षा करौ। “ब्रिटिश जिलाधिकारी एफ. एस. ग्राउस ने भी गोपेश्वर के बारे में लिखा है।जैसा गोपेश्वर महादेव की लीला भी अजब है। एक तरफ श्रीकृष्ण के महारास के दर्शनों की लालसा में उनका गोपीरूप धारण करना और दूसरी तरफ वृन्दावन के सड़कों के लिए कोतवाल हैं। शिव का यह दुर्लभ स्वरुप वृन्दावन के अलावा किसी और स्थान पर नहीं मिलेगा। श्री मद्भागवत में उल्लेख है जब रास करने की अभिलाषा से श्रीकृष्ण ने वेणु-वादन आरम्भ किया तो उसके स्वर को सुनकर भोलेनाथ भी प्रभु के रास-दर्शन की अभिलाषा में वृन्दावन आ पहुंचे।

कहते हैं श्रीकृष्ण की इस पावन लीला के बाद उनके प्रपौत्र वज्रनाथ ने इन्हे खोजकर वंशीवट के समीप स्थापित किया। तभी से गोपेश्वर महादेव यहाँ भक्तों को दर्शन लाभ दे रहे हैं।यहाँ साधकों ने इन्हे इस पवित्र वन के कोतवाल की संज्ञा दी है जिनके दरबार में हाजिरी के बिना ब्रजयात्रा पूर्ण नहीं मणि जाती है- “नाम विदित गोपेश्वर जिनकौ, ते वृंदा कानन कुतवार। ” विं.सं. १८२२ में व्रजयात्रा को आये दतिया के महाराज पारीछित देव ने भी गोपेश्वर के दर्शन करके अपनी व्रजयात्रा को सार्थक किया। मेरा लगातार आध्यात्म से जुड़े हुए विषयों पर लिखने का उद्देश्य लोगों को कुछ आध्यात्मिक जगत से जुडी जानकारियाँ देते रहना और समाज के कल्याण का है, किसी की भावनाओं को आहत करना मेरा उद्देश्य नही। क्युकि मनुष्य का परम कर्त्तव्य वाह्य या आंतरिक रूप से जीवन में स्थिरता प्राप्त करना है और समाज में लोगों को निःस्वार्थ प्रेरित करने और उनके उन्नति का मार्ग प्रशस्त करना है।

Dr.Meenakshi Pandey
Professor