फरीदाबाद ( विनोद वैष्णव )|केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों के दिलों में देशप्रेम व राष्ट्रवाद की भावना जगाने का काम किया है। यही कारण है कि आज देश की जनता जान चुकी है कि अगर देश किसी के हाथों में सुरक्षित है तो वह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्योंकि उनकी सोच और नीयत दोनों ही साफ है और भारत को सशक्त व मजबूत बनाने के लिए जो कड़े कदम उन्होंने उठाए है, वह पूर्व की सरकारों ने कभी नहीं उठाए। गुर्जर ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस पूरे देश को कश्मीर बनाना चाहती है इसलिए उसने अपने घोषणा पत्र में धारा 272 के कानून को हटाने का प्रावधान किया है, इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस की नीति और नीयत कितनी देशहित में है। गुर्जर सोमवार को अपने चुनावी जनसंपर्क अभियान के तहत गांव वजीरपुर, पलवली, बादशाहपुर, ददसिया, टिकावली, रिवाजपुर, देहा आदि में आयोजित सभाओं में ग्रामीणों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान गांवों में भाजपा उम्मीदवार कृष्णपाल गुर्जर का ग्रामीणों ने पगड़ी पहनाकर एवं फूल मालाओं से जोरदार स्वागत करते हुए उन्हें पुन: भारी मतों से विजयी बनाकर लोकसभा मेें भेजने का विश्वास दिलाया। गुर्जर ने कहा कि भाजपा की सोच देश के गरीब व मध्यमवर्गीय लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 60 साल के बाद किसानों को घर बैठे पेंशन देने, एक लाख तक खेती के लिए कर्ज पर 5 साल तक बिना ब्याज देने व 5 एकड़ जमीन पर सालाना 6 हजार रुपये देने, गरीबों को निशुल्क इलाज के लिए आयुष्मान योजना, धुंए व गैस से निजात दिलाने के लिए उज्जवला योजना सहित ऐसी अनेकों योजनाएं है, जिसका सीधा लाभ आज लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में पिछले पांच सालों के दौरान सडक़ों व पुलों का जाल बिछाया गया है क्योंकि सरकार की सोच है कि उन्नति के लिए बेहतर कनेक्विटी जरुरी है और इस दिशा में कारगर कदम उठाए गए है। कृष्णपाल गुर्जर ने स्पष्ट किया कि वह पिछले पांच सालों के दौरान उन्होंने एक चौकीदार के रुप में फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र की सेवा की है और अब उन्हें पूरा विश्वास है कि यहां की जनता 12 मई को भाजपा के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों को मजबूत करेगी। इस अवसर पर जितेंद्र त्यागी, शिवकुमार त्यागी, श्याम शर्मा सरपंच, रामपाल त्यागी, लच्छी त्यागी, विनोद शर्मा, घन्शी, बिजेंद्र, संजय सरपंच, संजीव नवल सहित अनेकों गणमान्य मौजूद थे।
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फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल और आईएपी ने जन्मजात हृदय रोग पर सीएमई का आयोजन किया
फरीदाबाद(vinod vaishnav) देश के सबसे बड़े मल्टी स्पेशियलिटी निजी अस्पताल, फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल ने फरीदाबाद चैप्टर की इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के सहयोग से जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) पर एक सीएमई का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल के 25 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। अमृता अस्पताल के प्रमुख विशेषज्ञों ने दर्शकों को संबोधित किया, जिसमें बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी और वयस्क जन्मजात हृदय रोग के हेड डॉ. एस राधाकृष्णन और बाल चिकित्सा और जन्मजात हृदय सर्जरी के हेड डॉ. आशीष कटेवा शामिल थे। फरीदाबाद चैप्टर की इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. अनिल नागे और सचिव डॉ. धनसुख कुमावत भी मंच पर मौजूद थे। अमृता अस्पताल के बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी और वयस्क जन्मजात हृदय रोग विभाग के हेड डॉ. एस राधाकृष्णन सीएचडी के लक्षणों के बारे में बात की और साथ ही सर्जिकल हस्तक्षेप की आवश्यकता कब होती है इस बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, “पश्चिमी देशों में 95% की तुलना में, भारत में अभी भी जन्मजात हृदय रोग वाले 2% से कम बच्चों का गर्भ में निदान किया जाता है। जन्म के बाद निदान होने पर भी बच्चे बेहद क्रिटिकल स्टेज में हॉस्पिटल पहुंचते हैं, उस वक़्त उनकी जान बचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। फीटल ईसीएचओ और ईसीएचओ कार्डियोग्राफी जैसी तकनीकों से अब हम सीएचडी का आसानी से निदान कर पाते हैं। बाल रोग विशेषज्ञों को सीएचडी के चेतावनी संकेतों के बारे में शिक्षित करने और इसे जल्दी पहचानने के तरीके की तत्काल आवश्यकता है। इस सीएमई का आयोजन उसी दिशा में एक कदम है।” अमृता अस्पताल के बाल चिकित्सा और जन्मजात हृदय सर्जरी के हेड डॉ. आशीष कटेवा ने अपने बच्चे में सीएचडी का पता चलने पर माता-पिता द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “जब माता-पिता को उनके बच्चे में सीएचडी का पता चलता है, तो उनके दिमाग में कई सवाल आते हैं। ये सवाल बीमारी से संबंधित होते हैं, उनके बच्चे को यह क्यों हुआ, क्या वे इसे रोकने के लिए कुछ कर सकते थे, क्या सीएचडी उनके दुसरे बच्चों को भी हो सकता है, क्या होगा अगर बच्चे की सर्जरी नहीं होती है, सर्जरी के जोखिम, सीएचडी के साथ उनके बच्चे की जिंदगी कैसी होगी आदि। बाल रोग विशेषज्ञ के लिए उनकी चिंताओं को सहानुभूति के साथ दूर करना बहुत आवश्यक है। डॉ कटेवा ने आगे कहा, भारत में सबसे ज्यादा सीएचडी मामले सामने आते हैं, जहां हर साल 200,000 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित पैदा होते हैं। हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में बच्चों का पता नहीं चल पाता है और इसलिए उनका इलाज नहीं किया जाता है, हम बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहे हैं। जन्मजात हृदय दोष के बारे न केवल जनता के बीच बल्कि चिकित्सकों के बीच भी में काफी गलत जानकारी है, जो इस बीमारी के इलाज में एक बड़ी चुनौती है। इस बातचीत का उद्देश्य उन सवालों का जवाब देना था जो माता-पिता और उपचार कर रहे बाल रोग विशेषज्ञ के पास सीएचडी के कारणों और रोकथाम, उपचार के परिणामों और सर्जरी के बाद लॉन्ग-टर्म में रोग के निदान के बारे में हो सकते हैं। फरीदाबाद चैप्टर की इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. अनिल नागे ने कहा कि सीएमई बाल रोग विशेषज्ञों को सीएचडी के बारे में शिक्षित करने के लिए आयोजित किया गया था, विशेष रूप से खतरनाक स्थितियों के लिए जिन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, “भारत में, अधिकांश बाल हृदय देखभाल सुविधाएं शहरों में हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में सीएचडी के उचित निदान और उपचार को मुश्किल बनाती हैं।सीएचडी की बेहतर समझ के लिए बाल रोग विशेषज्ञों के उचित प्रशिक्षण के साथ हमें भारत के सभी हिस्सों में इस तरह की और सुविधाओं की आवश्यकता है। अमृता अस्पताल के परिसर में एक अत्यधिक विशिष्टताओं के साथ बच्चों का अस्पताल है जो मातृ, प्रजनन और भ्रूण चिकित्सा और बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी, हृदय शल्य चिकित्सा और प्रत्यारोपण, रुमेटोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, न्यूरोसाइंसेस, बाल चिकित्सा आनुवंशिकी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, बाल चिकित्सा आर्थोपेडिक्स और बाल चिकित्सा और भ्रूण की सर्जरी सहित सभी बाल चिकित्सा उप-विशेषताओं से परिपूर्ण है।
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