फरीदाबाद(विनोद वैष्णव )।आयशर विद्यालय सेक्टर 46 फरीदाबाद में प्रेरणा दिवस का आयोजन किया गया जो 2 दिन तक चला कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नन्हे कलाकारों की प्रतिभाओं को उजागर करना था ।कार्यक्रम के प्रथम चरण में शास्त्रीय नृत्य ,पाश्चात्य नृत्य व इंग्लिश गायन आदि मुख्य आकर्षण के केंद्र रहे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं निर्णायक मंडल प्रीति पराशर, मिहिका सेन गुप्ता एकत्थक गुरु अंशु, चंद्रशेखर झाए रमण कुमार ,भीमसेन अरोड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे ।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके किया गया इस अवसर पर अनेक विद्यालयों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। शास्त्रीय नृत्य एवं पाश्चात्य नृत्य के अद्भुत संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया पहले चरण के परिणाम इस प्रकार रहे. शास्त्रीय नृत्य में एमण्वीण्एन ण्सेक्टर 17 ने प्रथम स्थान, एमण्वीण्एन अरावली ने द्वितीय स्थान तथा मानव रचना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इंग्लिश गायन में शिव नगर स्कूल ने प्रथम स्थान,अलवर पब्लिक स्कूल ने द्वितीय स्थान तथा डीण्एण्वी ण्सेक्टर 37 ने तृतीय स्थान प्राप्त किया ।पाश्चात्य नृत्य में अलवर पब्लिक स्कूल ने प्रथम स्थान मानव रचना सेक्टर 43 ने द्वितीय स्थान एआयशर स्कूल परवाणु ने तृतीय स्थान प्राप्त किया ।कार्यक्रम के दूसरे चरण के मुख्य आकर्षण के केंद्र रहे . टैप योर फीट बैंड परफॉर्मेंस एवं पोस्टर मेकिंग जिसके परिणाम इस प्रकार रहे .टैप योर फीट में एमण्वीण्एन ण्सेक्टर 17 ने प्रथम स्थान एमण्वीण्एनण् अरावली ने द्वितीय स्थान तथा दिल्ली स्कॉलर्स ने तृतीय स्थान प्राप्त किया । बैंड परफॉर्मेंस में अलवर पब्लिक स्कूल प्रथा एवं एमवीएन सेक्टर 17 ने तृतीय स्थान प्राप्त किया ।पोस्टर मेकिंग में डीण्पीण्एस सेक्टर 19 प्रथम एमण्वी एन द्वितीय तथा एम वी एन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। आयशर विद्यालय सेक्टर46 फरीदाबाद ने सभी कार्यक्रमों में भाग लिया परंतु मेजबान स्कूल होने के कारण अपने आप को स्पर्धा में शामिल नहीं किया इसलिए ओवरऑल ट्रॉफी एमवीएन सेक्टर 17 को दी गई। कार्यक्रम की थीम खुशी रखी गई जिसकी खुशी दर्शकों एवं प्रतिभागियों के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी ।पूरा वातावरण संगीतमय एवं तालियों की गूंज से गूंज उठा ।नन्हे कलाकारों की प्रतिभाओं के सभी कायल हो गए कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या सुश्री रितु कोहली ने आए हुए सभी प्रतिभागियों को बधाई दी तथा उनके कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी विद्यार्थियों में अद्भुत प्रतिभा है और आज इस मंच पर उनके प्रतिभाओं को देखने का अवसर प्राप्त हुआ उन्होंने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें बधाई दी।
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दिल्लीवासियों ने जिस लाहौर नै वेख्या ओ जम्याइ नै नाटक का आनन्द उठाया
Vinod Vaishnav :कला विशिष्ट संस्था से जुड़ी एक पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्ट,नाद फाउंडेशन द्वारा श्री सत्य साईं ऑडिटोरियम भीष्म पितामह मार्ग लोदी रोड न्यू दिल्ली में एक भव्य शाम का आयोजनकिया गया। जहां अस्मिता थियेटर ग्रप ने अरविंद गौर द्वारा निर्देशित जिस लाहौर नै वेख्या ओ जम्याइ नै, असगर वजाहत का एक नाटक प्रस्तुत किया।अभिनेता काकोली गौर, राहुल खन्ना, सवेरे गौर, ईश्वर सिंह, अमित रावल, दविंदर कौर, गिरीश पाल और शशांक वर्मा, शिवम् भसीन, दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी, श्रीराजीव शुक्ला एवं डीजी बीएसएफ श्री केके शर्मा जैसे कई नामी चेहरे इस अवसर पर मौजूद रहे। नाद फाउंडेशन की मैनेजमेंट ट्रस्टी निशी सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत कर उन्हेंअपना धन्यवाद व्यक्त किया।जिस लाहौर नै वेख्या ओ जम्याइ नै, एक नाटक है जो कि असगर वजाहत द्वारा लिखित है, पिछले 25 वर्षों से यह नाटक विश्वभर में रूपांतरित और प्रस्तुत किया जा रहा है पर इसकीलोकप्रियता फीकी होने से इसे इनकार कर दिया गया। इसके पीछे का कारण इसकी सार्वभौमिक मानवीय भाईचारे जैसे धर्म बाधाओं में कटौती को लेकर कि गई अपील थी। नाटक का कथानक विभाजन के बाद एक परिवार लखनऊ से लाहौर जाता है। शरणार्थी शिविर में रहने के बाद उसे एक बड़ा मकान ऐलॉट होता है। लेकिन जब वो वहां पहुंचते हैं तो देखते हैं कि एकबूढ़ी औरत रह गई है। उन्हें लगता है कि जब तक ये रहेगी मकान हमारा नहीं हो सकता। वो बूढ़ी औरत भी चाहती है कि ये लोग चले जाएं। तो नाटक एक संघर्ष की स्थिति से शुरुहोता है। लेकिन ये बूढ़ी औरत स्वभाव से बड़ी मददगार है और धीरे धीरे दोनों के बीच एक रिश्ता बनने लगता है। जब शहर के गुंडों को पता चलता है तो कि हिन्दू बुढिय़ा रह गई है तोउनकी कोशिश होती है कि उसे निकालें। लेकिन वही परिवार उसे बचाता है। बाद में जब वो मरती है तो सवाल उठता है कि इसका क्रिया कर्म कैसे किया जाए। स्थानीय मौलवी कीराय पर उसका अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से किया जाता है। उसके शव को राम नाम सत्त कहते हुए ले जाते हैं और रावी के किनारे जला देते हैं। इसकी प्रतिक्रिया में शहर के गुंडेमौलवी की हत्या कर देते हैं। असगर वजाहत को कहां से मिली प्रेरणा दिल्ली में मेरे एक पत्रकार दोस्त हैं संतोष कुमार। वो विभाजन के बाद लाहौर से दिल्ली आए थे। उन्होने एक किताब लिखी लाहौर नामा जिसमें एक बूढ़ी औरत का जिक्र था जो लाहौरमें ही रह गई थी और भारत नहीं आ पाई थी। इस विचार को लेकर मैंने आगे का ताना बाना बुना और धीरे-धीरे बहुत से रोचक पात्र निकलकर सामने आए। यह नाटक दो बातों परटिका है एक है क्रॉस कल्चरल समझ यानि लखनऊ का परिवार पंजाब की औरत से इंटरैक्शन करता है। दोनों एक दूसरे की भाषा नहीं समझते हैं लेकिन भावनाएं भाषा की सीमाएंतोड़ देती हैं। दूसरी बात धार्मिक सहिष्णुता की है। वास्तव में हर धर्म सिखाता है कि दूसरे का सम्मान करो और अच्छे संबंध बनाओ। पाकिस्तान में जब ये नाटक खेला गया था तोउसकी समीक्षा छपी थी जिसमें लिखा था कि इस नाटक का महत्व ही ये है कि यह धार्मिक सहिष्णुता का संदेश देता है। नाद फाउंडेशन के बारे में: नाद फाउंडेशन,एक पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्ट है जिसका लक्ष्य मानव पीड़ा को कम करना एवं दलितों के लिए नए अवसर विकसित करना है। जिससे की वेअपने जीवन को बेहतर बना सकें और शिक्षा प्रसार, विभिन्न धर्मार्थ कार्यक्रमों का आयोजन करके जैसे स्वास्थ्य शिविर, शैक्षणिक व चिकित्सा शिविर, विभिन्न प्रतियगिताओं एवम् सलाहव परामर्श सेवाओं के माध्यम से खुद को स्वतंत्र बनाने के लिए अपने दम पर खड़े हो सकें ।