विश्व पृथ्वी दिवस पर डी.ए.वी.शताब्दी महाविद्यालय में हरित पहल

फरीदाबाद (पिंकी जोशी) : डी.ए.वी. शताब्दी महाविद्यालय, फरीदाबाद की युथ रेड क्रॉस यूनिट तथा पर्यावरण विभाग द्वारा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी, फरीदाबाद के सौजन्य से “विश्व पृथ्वी दिवस” के अवसर पर एक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा हरित भविष्य के निर्माण के लिए ठोस संकल्प लेना था।

इस अवसर पर जिला रेड क्रॉस सोसाइटी, फरीदाबाद के सचिव श्री बिजेंद्र सोरोत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने सारगर्भित एवं प्रेरक उद्बोधन में कहा कि “आज के समय में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। वृक्ष हमारे जीवन के आधार हैं—ये हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं और पृथ्वी के संतुलन को बनाए रखते हैं। इसलिए केवल वृक्षारोपण करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण करना भी हमारा नैतिक कर्तव्य है।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे वृक्षारोपण को एक निरंतर अभियान के रूप में अपनाएं और इसे जन-आंदोलन का स्वरूप दें।

यह वृक्षारोपण अभियान महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण—डॉ. अंजू गुप्ता, डॉ. जितेंद्र ढुल, युथ रेड क्रॉस (बालक इकाई) के काउंसलर डॉ. अमित शर्मा, बालिका इकाई की काउंसलर सुश्री ओमिता जोहर, तथा पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह—की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने स्वयं वृक्षारोपण कर इस पहल को सार्थक बनाया।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह एवं समर्पण के साथ भाग लेते हुए न केवल पौधे लगाए, बल्कि उनके संरक्षण एवं नियमित देखभाल का भी संकल्प लिया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की शपथ ग्रहण करते हुए यह संदेश दिया कि “हरित पृथ्वी ही सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।”

यह कार्यक्रम न केवल एक पर्यावरणीय गतिविधि के रूप में सफल रहा, बल्कि इसने विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, कर्तव्यबोध एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ किया। डी.ए.वी. शताब्दी महाविद्यालय का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल के रूप में सराहा जा रहा है।

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