November, 2021

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शनैश्चरी अमावस्या का महत्त्व ,जानिए क्या है पीपल के वृक्ष की पूजा करने के लाभ

फरीदाबाद (पिंकी जोशी) : हिंदू धर्म के अनुसार मार्गशीर्ष माह की अमावस्या 4 दिसंबर, यानि शनिवार के दिन है। सनातन धर्म में शनैश्चरी अमावस्या का काफी महत्व है। इस दिन की जाने वाली पूजा, स्नान और दान आदि का पुण्य जीवन में प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन पीपल की पेड़ पूजा से जुड़े कुछ उपाय और पूजा पाठ करने से आपके जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

वृक्ष की परिक्रमा करें :

शनैश्चरी अमावस्या के दिन पीपल पूजन करने से उम्र और सौभाग्य दोनों में बढ़ोतरी होती है और आपके पितरः आपसे खुश होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। देवताओं एवं पितरों का इस दिन पीपल के पेड़ पर वास माना जाता है इसलिए शनैश्चरी अमावस्या पर पीपल की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। पूजा करने के साथ साथ आपको वृक्ष की परिकर्मा भी अवश्य लगानी चाहिए।

सूर्येदेव को करे जल अर्पित :

सूर्यदेव को रोज प्रातःकाल जल अवश्य अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से आपको इसका लाभ जरूर मिलेगा। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है की शनैश्चरी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ को प्रणाम करने के बाद वृक्ष पे जल अर्पित करे उसके बाद उसकी परिक्रमा करे। ऐसा करने से मानव की उम्र में वृद्धि होती है और जो व्यक्ति इसके वृक्ष पर जल अर्पित करता है उसके सभी पापों का अंत होकर स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

पीपल का वृक्ष लगाने होते है लाभदायक :

व्यक्तियों पे शनि भरी होता है उन्हें हर शनिवार शनिदेव की पूजा करनी चाहिए असा करने से आपको लाभ मिलेगा। अगर आपके जीवन मे कोई कष्ट है तो पीपल के वृक्ष की पूजा करना लाभदायक होता है। शनिदेव पर शनिवार के दिन सासरो का तेल चढ़ाने से व् कष्ट दूर होने लगते है लेकिन ध्यान रखे की आपको हर शनिवार असा करना होगा। श्याम के समय असा करना चाहिए आप एक सरसो के तेल का दीपक भी जला सकते है।

हनुमान चालीसा को पढ़ना है जरुरी :

शनैश्चरी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करते समय हनुमान चालीसा पड़ना काफी ाचा होता है असा करने से नकारात्मक ऊर्जा आपसे दूर रहती है और आपके आसपास का वातावरण काफी अच्छा रहता है और आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा रहती है। ऐसा करने से आपके शारीरिक और मानसिक तनाव भी काम होने लगते है।

सुबह के समये जलाएं दीपक :

यदि शनिदोष होने की वजह से आप परेशान रहते है और आपके हर कार्यो में अर्चनं आती है और करते काम बिगड़ जाते है तो सुबह प्रातःकाल उठकर स्नान करने के बाद घर के मंदिर में डीप अवश्ये जलाये। ऐसा करने के पश्चायत आपको पीपल के पेड़ के निचे भी सरसो के तेल का दिया जरूर जलाए।और शनिदेव का पुरे मन से पूजा पाठ करे।

नोट : सभी जानकारियां सोशल मीडिया द्वारा ली गयी है।

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जानिए कब है उत्पन्ना एकादशी का व्रत , पूजा विधि व उपाय

फरीदाबाद (पिंकी जोशी) : शास्त्रों में उत्पन्ना एकादशी का व्रत बड़ा ही पुण्यकारी बताया गया है। पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी उत्पन्ना एकादशी होती है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और एकादशी माता की पूजा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है । इस साल उत्पन्ना एकादशी 30 नवंबर , मंगलवार के दिन पड़ रही है। आज हम आपको साल 2021 उत्पन्ना एकादशी व्रत तिथि , पूजा व पारण का मुहूर्त , पूजा विधि और इस दिन सुख समृद्धि के लिए किये जाने वाले एक उपाय के बारे में बताएँगे।

उत्पन्ना एकादशी तिथि व शुभ मुहूर्त

  • उत्पन्ना एकादशी 30 नवंबर मंगलवार को है।
  • एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी 30 नवंबर प्रातः काल 04:13 मिनट पर।
  • एकादशी तिथि समाप्त 1 दिसम्बर प्रातः काल 02:13 मिनट पर।
  • उत्पन्ना एकादशी व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त होगा- 1 दिसम्बर प्रातःकाल 07:34 मिनट से प्रातःकाल 09:02 मिनट तक

उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि

एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से शुरू होकर द्वादशी तक चलता है। एकादशी तिथि को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर व्रत शुरू करे। सबसे पहले पूजास्थल पर एक साफ चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करे अब पूजा में भगवान विष्णु को फल , फूल , नैवेद्य अर्पण करते हुए धूप व दीप ” दिखाकर विधि – विधान से पूजा करे।

मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पूजा का ख़ास महत्व है इसीलिए पूजा के समय कृष्णा पूजा भी जरूर करे . पूजा में विष्णु मंत्रो का जाप कर एकादशी की व्रत कथा पढ़ने या सुनने के बाद सभी में प्रसाद वितरण करे। अगले दिन द्वादशी तिथि को ब्राह्मण को दान – दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।

उत्पन्ना एकादशी उपाय

  • एकादशी की सुबह पीपल के पेड़ की पूजा कर पेड़ की जड़ में कच्चा दूध अर्पित कर घी का दीपक जला दे इससे मनोकामना पूरी होती है।
  • एकादशी की रात्रि में श्रीहरि के नाम से दीपदान करना चाहिए इससे पुण्य फलो की प्राप्ति होती है।
  • एकादशी पर तुलसी पूजा करे और तुलसी पूजन के समय ॐ नमो भगवत वासुदेवाय मंत्र का जाप करें ।
  • एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के समक्ष घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करे इससे भगवान विष्णु जल्द प्रसन्न होकर आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं।
  • यदि आप एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के साथ लक्ष्मी जी की पूजा कर उन्हें हल्दी की गांठ अर्पण करते है तो आपके सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है।

नोट : सभी जानकारिया सोशल मीडिया द्वारा ली गयी है।

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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व पार्षद जगन डागर के निवास पर जलपान करते राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुडडा

फरीदाबाद (विनोद वैष्णव) : वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व पार्षद जगन डागर के निवास पर जलपान करते राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुडडा ने कहा है कि किसानों के लंबे संघर्ष, संयम, शांति और सत्याग्रह की जीत के चलते सरकार  ने तीन कृषि कानूनों पर फैसला लिया है। अगर कृषि कानून पहले ही वापिस ले लिया होता तो 712 किसानों को जान न गंवाई पड़ती। श्री हुडडा बीती रात एक समारोह में शिरकत करने के बाद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व पार्षद जगन डागर के निवास पर पहुंचे थे। जहां चाय के कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विपक्ष होने के नाते हम शुरू से किसानों की मांगों का समर्थन कर रहे थे। क्योंकि तीन कृषि कानून किसानों के हक में नहीं थे। उनकी शुरू से मांग रही है कि सरकार स्वामीनाथन आयोग के सी2 फार्मूले के तहत किसानों को एमएसपी की गारंटी दे। एमएसपी से कम खरीद पर सजा के प्रावधान का कानून बनाया जाए। सरकार की तरफ से आंदोलनरत किसानों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए। साथ ही पंजाब सरकार की तरह हरियाणा सरकार भी आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दे। किसानों की समस्याओं के बारे में बात करते हुए कहा कि आज ना उन्हें एमएसपी मिल रही और ना ही खाद। किसान की लागत लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन एमएसपी में नाममात्र बढ़ोतरी हो रही है। कांग्रेस कार्यकाल में ना बीज, ना खाद, ना कीटनाशक और ना ही खेती उपकरणों पर कोई टैक्स था। लेकिन इस सरकार ने खेती से जुड़ी हर चीज पर टैक्स लगाकर खेती को महंगा करने का काम किया।


उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसानों का कुछ भला करना चाहती है तो उसे स्वामीनाथन रिपोर्ट के सी 2 फार्मूले के तहत किसानों को एमएसपी देनी चाहिए और कृषि क्षेत्र को लाभकारी बनाने के लिए योजनाओं पर काम करना चाहिए। यह सरकार किसानों को उचित रेट और रियायत देने के बजाय उनपर पाबंदियां और नए नए कानून थोप रही है। पराली को लेकर बेवजह अन्नदाता को परेशान किया जा रहा है जबकि प्रदूषण को बढ़ाने में अन्य फैक्टर ज्यादा जिम्मेदार है। कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार किसानों को पराली का कोई निवारण देने में विफल रही है। इस अवसर पर विधायक नीरज शर्मा, पूर्व विधायक ललित नागर,रघूवीर तेवतिया, कांग्रेसी नेता विजय प्रताप  सिंह , योगेश गौड़, गुलशन बग्गा, नितिन सिंगला, अब्दुल गफ्फार कुरैशी, अनिल शर्मा, वेदपाल दायमा, राजेश आर्य, शिक्षाविद नारायण डागर सहित अनेक गणमांय लोग उपस्थित रहे।

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लिंग्याज विद्यापीठ में हुआ पीएचडी स्कॉलर का ऑनलाइन ओरिएंटेशन डे

फरीदाबाद ( विनोद वैष्णव ) : लिंग्याज विद्यापीठ (डीम्ड-टु-बी) यूनिवर्सिटी में नए पीएचडी बैच का ऑनलाइन ओरिएंटेशन डे मनाया गया। सर्वप्रथम लिंगयाज एंथम द्वारा छात्रों का कॉलेज के प्रति उत्साह बढ़ाया गया। मंच का संचालन डिपारेटमेंट ऑफ एजुकेशन की एचओडी डॉ. अंकुर त्यागी ने किया। इस अवसर पर डीन आर.एन.डी डॉ. विश्वजीत जितुरी ने पीएचडी छात्रों को संबोधित करते हुए कुछ टिप्स और ट्रिक्स बताएं। साथ ही अपने बहुमूल्य अनुभवों को सभी के साथ सांझा किया। उन्होंने कहां कि पढ़ाई शुरू करने का कोई समय नहीं होता कोई उर्म नहीं होती। बस अपने गोल पर फोकस करना चाहिए कि हमें कहां पहुंचना है। तत्पश्चात डायरेक्टर अकादमिक प्रो. जसकिरण कौर ने पीएचडी को क्षेत्र की सर्वोच्च शैक्षणिक उपलब्धि माना जाता है। पीएचडी प्राप्त करने के लिए कई वर्षों के समर्पणकड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहां कि अपनी स्टडी को स्मार्टली डिवाइड करे। ताकि एक निर्धारित समय में ही पाएचडी प्राप्त कर सके। वहीं डीन कॉरपोरेट अफेयर्स डॉ. प्रसाद ने कहां कि यदि हम कोई भी पूरी लग्न और मेहनत से करते है तो हमें सफलता अवश्य प्राप्त होती है। पीएचडी की डिग्री प्राप्त करना बड़ी मेहनत का काम है। बिना फोकस और बिना पढ़ाई के इस डिग्री को प्राप्त नहीं किया जा सकता।

पिछले साल ही लिंग्याज यूनिवर्सिटी से पीएचडी ग्रहण कर चुके कर्नल (डॉ.) अश्विनी कुमार जोशी (सेवानिवृत्त) अतिथि वक्ता के तौर पर ऑनलाइन ओरिएंटेशन में शामिल हुए। उन्होंने अपने चार दशकों से अधिक अनुभव से रूबरू कराया। वर्तमान में अर्न्स्ट एंड यंग के निर्देशक हैं। इसके अलावा स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रिचा व स्कूल ऑफ बेसिक एंड एपलाइड साइंसिस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रिजवान ने सभी पीएचडी स्कॉलर्स को कोर्सिस व रूल्स एंड रेगुलेशन से अवगत कराया। इस अवसर पर रिसर्च एंड पीएचडी कोऑर्डिनेटर डॉ. तापसी नागपाल ने सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का समापन किया।

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समैरिटन फाउंडेशन ने सरकारी विद्यालय पिंगोड़ में बांटे 1600 बच्चों को जूते जुराब व अन्य शिक्षण सामग्री ।

आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पिंगोड़ (1067) ब्लॉक हसनपुर, जिला पलवल के प्रांगण में समैरिटन हेल्थ एंड एजुकेशन फाउंडेशन ( SHEF ) के बैनर तले प्रधानचार्य श्री सुशील कुमार कण्व की अध्यक्षता में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें विद्यालय और विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए फाउंडेशन के अधिकारियों ने बड़ा हृदय दिल रख शिक्षण सामग्री , जूते जुराब ,खेलकूद व बिसक्ट्स स्नैक्स व विभिन्न सामग्री दान की जिसमें पांच कंप्यूटर सीपीयू मॉनिटर के साथ, दो प्रिंटर व स्कैनर , 24 छतपंखे, दस म्यूर जग, 400 मीटर टाटपट्टी, 45 मीटर दरी, 1657 जोड़ी जूते, 1600 जोड़ी जुराबे, 1440 कॉपी, 1400 पेन, 1400 पेन्सिल, 500 एग्जाम बोर्ड, 1440 बिस्किट पैकेट, 1440 नमकीन पैकेट, चार फुटबॉल, दो वॉलीबॉल, आठ बैडमिंटन रॉकेट, छह शटल , दो बल्ला,छह गेंद, दस कूदने वाली रस्सी आदि सामग्री विद्यालय को दान स्वरूप भेंट की । समैरिटन
फाउंडेशन के अध्यक्ष सुचित अग्रवाल जी, उपाध्यक्ष विक्की सिंघानिया जी , महासचिव संदीप जैन जी , कोषाध्यक्ष विकास गुप्ता जी , मुख्य सलाहकार कपिल सिंघानिया जी, मुख्य परिचालक/ संरक्षक अधिकारी दीपक सिंघानिया जी, संयुक्त सचिव अभिषेक अग्रवाल जी के कर कमलों से विद्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व सभी अध्यापकों को शॉल भेंट कर व हेल्थकिट उपहार स्वरूप देकर विशेष रूप से सम्मानित किया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार के मीडिया कोऑर्डिनेटर श्री मुकेश वशिष्ठ जी ने शिरकत की । अतिविशिष्ट अतिथि के तौर पर खंड शिक्षा अधिकारी हसनपुर डॉ.मामराज रावत जी ने उपस्थित दर्ज कराई । विशिष्ट अतिथि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खाम्बी के प्रधानाचार्य श्री टेकचंद जी और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सीहा के प्रधानाचार्य श्री शिवदत्त जी रहे ।
इस विशेष अवसर पर गांव पिंगोड़ के पूर्व सरपंच श्री बलवीर , वर्तमान सरपंच श्री छंगालाल , डॉक्टर बैजनाथ, सेवानिवृत्त कप्तान इंद्रजीत , रहीश मैनेजर, श्यामलाल मेंबर, गोकुल नंबरदार, ओमप्रकाश नंबरदार, पप्पी पंडित, रमेश ठेकेदार, शीलकुमार सेवानिवृत्त फौजी , सतीश , चंदर आदि की उपस्थिति सराहनीय रही । कार्यक्रम को पूर्णतः सफल बनाने में विद्यालय के कक्षा पहली से बारहवीं के समस्त अध्यापक सदस्यों की भूमिका सराहनीय व रही।
कार्यक्रम का मंच संचालन श्री एकांत जी व श्री नवीन कुमार प्रवक्ता ने संयुक्त रूप से किया।
फाउंडेशन के सभी पदाधिकारियों व दानी- दाताओं का विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुशील कुमार ने हृदय की गहराइयों से बार-बार धन्यवाद किया और विद्यालय परिवार की तरफ से आभार व्यक्त किया ।

फ़ोटो में दानी सज्जनों को पगड़ी बांध सम्मान करते पिंगोड़ के ग्रामवासी

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एन आई टी -86 के गांव पावटा मोहबताबाद में स्थित खेल स्टेडियम में वीर गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की भव्य प्रतिमा का अनावरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप सिंह के सुपुत्र रघुविन्दर प्रताप सिंह उपस्थित थे

फोटो कैप्शन: वीर गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की भव्य प्रतिमा का अनावरण समारोह में उपस्थित पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप सिंह के सुपुत्र रघुविन्दर प्रताप सिंह ,विधायक मुखिया गुर्जर,
वीर गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की भव्य प्रतिमा का अनावरण,
पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप सिंह के सुपुत्र रघुविन्द्रर प्रताप सिंह का किया गया स्वागत
रघुविन्द्रर प्रताप सिंह ने आयोजकों को भेंट की सहयोग राशि 31 हजार
फरीदाबाद, । एन आई टी -86 के गांव पावटा मोहबताबाद में स्थित खेल स्टेडियम में वीर गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की भव्य प्रतिमा का अनावरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप सिंह के सुपुत्र रघुविन्दर प्रताप सिंह उपस्थित थे। समारोह में रघुविन्दर प्रताप सिंह का फूल मालाओं से स्वागत किया गया। इस अवसर पर समाजसेवी रघुविन्दर प्रताप सिंह ने आयोजकों को बतौर सहयोग राशि 31 हजार रूपये भेंट किए।  समारोह में वीर गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम में गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य पर भी चर्चा की और बताया की आज अगर हिन्दू धर्म भारत में बचा हुआ है उसका श्रेय गुर्जर प्रतिहार राजवंश को जाता है। जिन्होंने अरबों से 300 वर्ष तक लगभग 200 से ज्यादा युद्ध किये जिसका परिणाम है कि हम आज यहां सुरक्षित है। गुर्जर प्रतिहारो का इतिहास सौ 300 वर्षों का न होकर हजारो वर्षो का यह कटु सत्य है कि इस धरती पर स्थाई रुप से किसी राजवंश ने शासन नही किया है। यहां अनेको गुर्जर राजवंशो ने समयानुसार शासन किया और अपने वीरता, शौर्य , कला का प्रदर्शन कर सभी को आश्चर्य चकित किया। भारत देश हमेशा ही गुर्जर प्रतिहारो का रिणी रहेगा उनके अदभुत शौर्य और पराक्रम का जो उन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए न्यौछावर किया है। जिसे सभी विद्वानों ने भी माना है। इस अवसर रणवीर चंदीला, अंतराम तंवर, विधायक मुखिया जी, ईश्वर ,एडवोकेट कन्हैया भड़ाना , मंगवाल सरपंच, राजिंदर थानेदार, वीर ङ्क्षसह नम्बरदार, अर्जुन भड़ाना, पप्पू सरपंच ,मनोज पायला ,जी आर भड़ाना , बीरू आदि गणमांय लोग उपस्थित थे।

 

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डॉ. गौतम को गोवा में मिला द मोस्ट एडमायर सेक्सोलॉजिस्ट इन एशिया अवॉर्ड अभीनेत्री हुमा कुरैशी के हाथों

गोवा/फरीदाबाद(विनोद वैष्णव) | गोवा में आयोजित नेशनल बिजनेस सर्विसेज लीडरशिप अवार्ड फंक्शन में मुख्य अतिथि बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने एशिया के जाने माने प्रसिद्ध गुप्त रोग विशेषज्ञ डॉ. इंद्रजीत सिंह गौतम को द मोस्ट एडमायर सेक्सोलॉजिस्ट इन एशिया अवॉर्ड से सम्मानित किया।

गौरतलब है कि, देश के कई हिस्सों से अलग – अलग कैटेगरी में बिजनेस उद्यमीयों का चयन किया गया। वहीं हेल्थ केयर सेक्टर में फरीदाबाद से डॉ. इंद्रजीत सिंह गौतम को मुख्य अतिथि बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने अवॉर्ड दिया।

आपको बता दें कि डॉ. इंद्रजीत सिंह गौतम – गौतम क्लीनिक के डायरेक्टर हैं, और देश विदेश में कई क्लिनिक्स हैं। डॉ. गौतम एक सेक्सोलॉजिस्ट एवं पुरुष रोग विशेषज्ञ हैं जोकि पुरुषो में गुप्त रोग के इलाज में माहिर है।

डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि, वैसे तो मुझे हैल्थ केयर सेक्टर में बहुत से अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है, परंतु यह अवॉर्ड हमारी पूरी टीम के लिए खास है, क्यूंकि एनसीआर से इतनी दूर की कंपनी ने हमारी कुशलता और सफल इलाज को देखते हुए हमारा चयन किया। उन्होंने कहा कि इस अवॉर्ड का श्रेय हमारी पूरी टीम को जाता है, और साथ ही उन सभी मरीजों को जिन्होंने गौतम क्लिनिक से सफल इलाज कराया। उन्होंने आयोजक का धन्यवाद करते हुए कहा कि, नेशनल बिजनेस सर्विसेज लीडरशिप अवॉर्ड में मेरा चयन किया, और मुझे बेस्ट एशिया सेक्सोलॉजिस्ट अवॉर्ड से नवाज़ा गया।

वहीं डॉ. गौतम ने कहा कि, गुप्त रोग पुरुष में होने वाले योन रोग हैं, क्योंकि इन बिमारियों के बारे में पुरुषो में बहुत संकोच होता है। इस कारण से वह इन रोगों का सही इलाज नहीं करवा पाते। इसीलिए यह रोग गुप्त रहते हैं और पीड़ित पुरुष गुप्त रोग के जाल में फंसते चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग इक्कीसवीं सदी में हैं, और अब सेक्स पर खुल के बात की जाती हैं, स्कूलों में सेक्स एजूकेशन दी जा रही है’ तो फिर गुप्त रोग होने पर हिचकना क्यों ?

उन्होंने कहा कि, गुप्त रोग का सफल इलाज आयुर्वेदिक एवं अंग्रेजी दवाओं से संभव है । कई नई तकनीकों एवं आविष्कारों के मदद से आज बहु उपयोगी एवं कारगर दवाइयों से गुप्त रोग का सफल इलाज संभव है। गुप्त रोग का इलाज हमारे क्लिनिक पर अवेलेबल है ।

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जानिए कब है मार्गशीष प्रदोष का व्रत , क्या है इस व्रत की मान्यता

फरीदाबाद (पिंकी जोशी) : प्रत्येक माह के दोनों पक्षों शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाने वाला व्रत प्रदोष व्रत कहलाता है यह व्रत भगवान् शिव को समर्पित है . शिव पुराण के अनुसार इस व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल अर्थात शाम के समय करने का विधान है शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़े तो वह गुरु प्रदोष होता हैं। आज हम आपको मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन आने वाले प्रदोष व्रत की शुभ तिथि , प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त , पूजा विधि , और गुरु प्रदोष के दिन क्या करना चाहिए उसके बारे मे बताएंगे।

मार्गशीर्ष प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2021

  • साल 2021 मार्गशीर्ष मास का प्रदोष व्रत 2 दिसंबर गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
  • प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त होगा- 2 दिसंबर गुरुवार सायंकाल 05:24 मिनट से 08:07 मिनट तक।
  • ॐ त्रयोदशी तिथि आरम्भ होगी 1 दिसंबर रात्रि 11:35 मिनट पर।
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी- 2 दिसंबर रात्रि 08:26 मिनट पर।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि :

मान्यता है की प्रदोष व्रत करने से कठिन समस्याएं भी दूर होने लगती है सूर्यास्त के बाद और रात के आने से पहले का समय प्रदोष काल होता है जो शिव भक्ति के लिए सबसे शुभ समय माना गया है गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष गुरु प्रदोष कहलाता है इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करे और व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव माता पार्वती और गणेश जी की विधिवत पूजा करे।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि :-

सांयकाल के समय भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराकर सभी पूजन सामग्री व बिल्वपत्र अवश्य अर्पित करे इसके बाद शिव परिवार के समक्ष घी का दीपक जलाकर गं गणपतये नमः और शिव पंचाक्षरी मन्त्र नमः शिवाय का 108 बार जाप करें और अंत में महादेव को सफेद चावल से बनी खीर का भोग लगाकर पूजा संपन्न करने के बाद प्रसाद वितरण करे।

गुरु प्रदोष व्रत महाउपाय :-

प्रदोष व्रत भगवान शिव व माता गौरी को प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम होता है। वही अगर प्रदोष व्रत गुरु प्रदोष हो तो इस दिन का महत्व और भी अधिक बड़ जाता है शास्त्रों के अनुसार गुरु प्रदोष के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाए तो व्यक्ति का भाग्य चमक सकता है तो आइये जानते है गुरु प्रदोष के दिन किये जाने वाले उपाय क्या है –

  • गुरु प्रदोष के दिन किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को पीले फल , पीला कपड़ा , चने की दाल , हल्दी , गुड़ व अन्य भोजन सामग्री दान करना शुभ होता है।
  • गुरु प्रदोष के दिन भगवन शिव के साथ भगवान विष्णु जी की पूजा कर उन्हें पीले फल फूल अर्पण कर पीली मिठाई का भोग लगाए तो यह उपाय मनोकामना प्राप्त करने वाला होता है।
  • गुरु प्रदोष के दिन पूजा में चने की दाल , पीला वस्त्र और साबुत पीली हल्दी पीली रखकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से सभी समस्याएं दूर हो जाती है।
  • गुरु प्रदोष के दिन प्रदोष काल में शिवलिंग का जलाभिषेक कर पीपल के वृक्ष की पूजा करने और वहां पर शुद्ध घी का दीपक जलाने से सभी सुखो की प्राप्ति होती है।

नोट : सभी जानकारियां सोशल मीडिया द्वारा ली गई है।

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शिक्षकों की शौचनीय स्तिथि

फरीदाबाद (दीपक शर्मा) :- रायन इंटरनेशनल स्कूल फरीदाबाद के अध्यापकों के साल 2016 से चले आ रहे लंबित अधिकार हनन की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं । युग निर्माता की तथाकथित उपाधि से पुकारे जाने वाले शिक्षकों की वास्तविक स्थिति क्या है। प्राइवेट स्कूलों को भी सीबीएससी तथा शिक्षा विभाग के दिशा निर्देशों का पूर्ण तरह पालन करना होता है । परंतु विद्यालय में शिक्षकों को दिए जाने वाले मानदेय तथा कार्य स्थल वातावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है । कोविड -19 की विषम परिस्थितियों में अपने स्वयं के सीमित संसाधनों के साथ भी शिक्षकों ने छात्रों की पढ़ाई में कोई व्यवधान नहीं आने दिया ।

विद्यालय की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षकों द्वारा किए गए सहयोग की तथा योगदान की कोई कीमत नहीं है । परंतु खेद का विषय यह है कि विद्यालय को दिए जाने वाले इस सहयोग के बदले में शिक्षकों को केवल मानसिक व आर्थिक शोषण ही प्राप्त हो रहा है । नियमानुसार पदोन्नति , महंगाई भत्ते , वार्षिक आय वृद्धि , मानवीय दृष्टि से निर्मित टाइम टेबल तथा कार्यभार जैसे आधारभूत अधिकारों पर भी कोई ध्यान देने या बात करने के लिए तैयार नहीं है । विद्यालय प्रबंधकों से बार – बार बात करने का शांति पूर्ण आग्रह करने के बावजूद भी उनके सहयोग पूर्ण रवैये तथा शिक्षकों के साथ बैठकर समस्या का समाधान करने के स्थान पर उन्हें विभागीय कार्यवाही का भय दिखाते हुए नोटिस दिए जा रहे हैं ।

शिक्षकों द्वारा अपने हक की आवाज उठाने के विरोध में प्रबंधक द्वारा उन्हें उनकी तनख्वाह काटे जाने के धमकी भरे मेल भेजे जा रहे हैं । शिक्षकों तथा छात्रों की आधारभूत आवश्यकताओं जैसे स्वच्छ पेयजल तथा स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था की ओर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस अव्यवस्था के प्रति अपनी आवाज उठाते हुए शिक्षकों के स्वाभिमान तथा सम्मान के लिए 9 नवंबर 2021 से सत्याग्रह आरंभ किया गया है । इस समस्या के त्वरित समाधान के लिए प्रबंधकों से लिखित आश्वासन की प्राप्ति की अपेक्षा करते हैं ताकि शिक्षण कार्य निर्बाध गति से आरंभ किया जा सके । इसके लिए आप सबका सहयोग अपेक्षित है।

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कल है गुरु नानक जयंती , जानिए क्या है कार्त‍िक पूर्ण‍िमा पर मनाए जाने वाले गुरु पूरब का महत्‍व

फरीदाबाद (पिंकी जोशी) : सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले धर्म गुरु गुरुनानक देव जी की जयंती 19 नवंबर को मनाई जाएगी। गुरुनानक देव का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इस पवित्र दिन को सिख धर्म के अनुयायी गुरु प्रकाश पर्व/गुरुपरब के रूप में बनाते हैं। गुरु नानक जयंती को सिख धर्म में सबसे पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है।

गुरुद्वारों में आस्था की धूम :-

गुरुपरब के मौके पर गुरुद्वारों व आसपास के इलाकों की साफ-सफाई करने के बाद गुरद्वारों को सजाया जाता है। इसके बाद गुरु पूर्णिमा/प्रकाश पर्व/गुरुपरब के दिन सुबह से नगर कीर्तन के साथ प्रभातफेरी निकाली जाती है। नगर कीर्तन की अगुवाई गुरु पंच प्यारे करते हैं। प्रभातफेरी गुरुद्वारे से शुरू होती है और नगर में फिरने के बाद गुरुद्वारे तक वापस आती है। इसके बाद विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि गुरुनानक जयंती के दो दिन पहले गुरुद्वारों पर गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ का आयोजन किया जाता है। गुरुपरब पर दो दिन तक होने वाले महोत्सव पर लोग जगह-जगह कीर्तन और लंगर का आयोजन करते हैं।

सिखों के लिए गुरु नानक जयंती बहुत बड़ा त्यौहार होता है। यह दीपावली की तरह ही धूमधाम से मनाया जाता है। गुरु नानक जयंती को गुरु पर्व, प्रकाश पर्व या गुरु पूरब के नाम से भी बुलाया जाता हैं। इस साल यह 19 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। जानकारों के मुताबिक इसी दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। यह हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को धूमधाम से मनाया जाता है। आपको बता दें, गुरु नानक देव जी ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी। इस दिन सिख धर्म के लोग प्रभात फेरी लगाकर गुरुद्वारे में मत्था टेकते हैं।

गुरु नानक जयंती का महत्व :-

सिखों का विशेष पर्व कार्त‍िक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था और इसी कारण इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 को राय भोई की तलवंडी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित ननकाना साहिब में पड़ता है। इस जगह का नाम ही गुरु नानक देव जी के नाम पर पड़ा है।

गुरु नानक जयंती पर गुरुद्वारे में शबद-कीर्तन के साथ भक्तों के लिए लंगर लगता है। इस दिन गुरुद्वारे में रुमाला चढ़ाने का रिवाज होता है। इस दिन भक्त अपनी श्रद्धा से गुरुद्वारे में कोई न कोई सेवा जरूर देते हैं। यहां सेवा का अवसर पाना बहुत पुण्य माना जाता है। साथ ही इस दिन गुरबाणी का पाठ करते हैं।

नोट : सभी जानकारिया सोशल मीडिया द्वारा एकत्रित की गयी है।