सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा आयोजित मानवता-फेस्ट-2018

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Posted by: | Posted on: September 20, 2018

सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा वसुन्धरा परिसर में प्रतियोगिता आयोजित की गयी

( विनोद वैष्णव )| सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा मानवता विषय पर ५ वर्ष से १२ वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में नन्हें-मुन्ने बच्चों ने बढ़चढ़कर भाग लिया।

प्रतियोगिता मानवता विषय पर आधारित थी, जिसमें स्वरचित कविताएं एवं गधांश के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करने थे। प्रत्येक प्रतिभागी को कम से कम २ मिनट और अधिक से अधिक ३ मिनट तक बोलने का अवसर प्राप्त हुआ।

इस प्रतियोगिता में लगभग १०० बच्चों ने भाग लिया, यह प्रतियोगिता दो चरण में हुई प्रथम चरण की प्रतियोगिता में से ११ प्रतिभागियों को चुना गया, तत्पश्चात दूसरी चरण की प्रतियोगिता में से विजेताओं को चुना गया। गाजिय़ाबाद से प्रशान्त प्रथम स्थान पर, जाग्रति भारती गुरुग्राम से द्वितीय स्थान पर एवं फरीदाबाद से हित्कर बढ़ेरा तृतीय स्थान पर रहे।

कार्यक्रम के मध्य में ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी एवं मैनेजिंग ट्रस्टी  रेशमा गान्धी जी ने विजेताओं को पुरुष्कारों से सममानित किया। इसके साथ ही  सजन जी ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि यदि बच्चों को सतयुगी इन्सान बनाना है तो उनको बचपन से ही मानवीय गुणाष से प्रेरित किया जाए, और इस तरह की प्रतियोगिताओं के माध्यम से ही बच्चे अपनी यादगीरी में मानवता जैसे महान गुण को रखकर अपने घर-परिवार समाज व देश को महान बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं।  सजन जी ने इसी प्रकार की प्रतियोगिताओं को जारी रखने के निर्देश भी दिये।

Posted by: | Posted on: September 4, 2018

सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा आयोजित विलक्षण

( विनोद वैष्णव ) | वैश्विक स्तर पर स्कूली छात्रों व जन सामान्य में उच्च नैतिक मानवीय मूल्यों की स्थापना द्वारा सदाचार का मार्ग प्रशस्त करने हेतु सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय मानवता ई-ओलमिपयाड-२०१८ का आयोजन किया गया था। आनलाइन आयोजित १५ मिनट की इस परीक्षा के अंतर्गत कुल मिलाकर २५ बहुविकल्पीय रुचिकर चित्रात्मक प्रश्नों का समावेश किया गया था जोकि किसी भी धर्म विशेष से समबन्धित न होकर पूरी तरह एक मानव के जीवन में नैतिक मानवीय मूल्यों को धारने की आवश्यकता को दर्शाते थे। परीक्षा की एक खास विशेषता यह थी कि यह परीक्षा परीक्षार्थी अग्रेजी एवं हिन्दी किसी भी माध्यम में दे सकते थे व परीक्षा देने के उपरांत तुरन्त अपना परिणाम व ई-सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते थे। यही नहीं वैश्विक स्तर पर मानवता अपना कर चरित्रवान बनने का संदेश प्रसारित करने हेतु सजनों इस परीक्षा को पूरी तरह नि: शुल्क रखा रखा गया था। सबकी सूचनार्थ दिनाँक १५ जून से लेकर दिनाँक ३१ अगस्त २०१८ के लघु अन्तराल में साढ़े छ: लाख से भी अधिक सजनों ने आनलाइन इस परीक्षा को समपन्न कर आशातीत सफलता के मुकाम कायम किए है।

इस संदर्भ में आज प्रात: स्कूल स्तर पर इस परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया है। कालेज व सामान्य स्तर पर इस परीक्षा के परिणाम कल घोषित कर दिए जाएंगे।  सबकी सूचनार्थ टॉप हजार विजेताओ को लैपटाप, टेबलेट, स्मार्टफोन, टी0वी, ई-गेजेटस व अन्य आकर्षण इनाम दिनाँक ७ सितमबर २०१८ को विश्व समभाव दिवस के शुभावसर पर सतयुग दर्शन ट्रस्ट के विशाल सभागार में, गणमान्य व्यक्तियों, दूर-दराज से आए विभिन्न प्रधानाचार्यों के सममुख प्रदान किए जाएंगे।

एक अच्छा व नेक इन्सान बनने के साथ-साथ आकर्षक इनाम के रूप में स्मार्ट फोन जीत सकते हैं। इस अभियान के अंतर्गत दिनाँक १ सितमबर से ६ सितमबर तक सबसे कम समय में शत् -प्रतिशत् अंक प्राप्त करने वाले परीक्षार्थियों का परीक्षा परिणाम लक्की ड्रा के माध्यम से निकाला जाएगा। यह लक्की ड्रा दिनाँक ६ सितमबर २०१८ सायकाल निकाला जाएगा व प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेताओं को मिलेगा स्मार्ट फोन। इस शुभ सूचना को जानने के पश्चात् सजनों हम सबके लिए बनता है कि पन्द्रह मिनट के लिए आयोजित इस आनलाइन परीक्षा को अवश्य ही अपने परिवार व सगे-समबन्धियों सहित निर्धारित तारीख से पहले समपन्न करें। सो सजनों खुद को बदलने का यह सुनहरी अवसर जाने न दीजिए और दिनाँक ७ सितमबर २०१८-विश्व समभाव दिवस के शुभावसर पर सपरिवार पधार कर सद्मार्ग पर प्रशस्त होने का लाभ उठाइए। याद रहे सभी सजन अपना स्थान प्रात: साढे नौ बजे तक अवश्य ग्रहण कर लें।

 

Posted by: | Posted on: July 23, 2018

सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा आयोजित अनूठा अंतर्राष्ट्रीय मानवता ई-ओलमिपयाड-२०१८

( विनोद वैष्णव )| सभी की सूचनार्थ वैश्विक स्तर पर स्कूली छात्रों व जन सामान्य में उच्च नैतिक मानवीय मूल्यों की स्थापना द्वारा सदाचार का मार्ग प्रशस्त करने हेतु सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय मानवता ई-ओलमिपयाड-२०१८ का आयोजन किया गया है। आनलाइन आयोजित १५ मिनट की इस परीक्षा को किसी भी उम्र, जाति, वर्ग या समप्रदाय का कोई भी सजन बिना किसी भेदभाव के दे सकता है। इस परीक्षा के अंतर्गत कुल मिलाकर २५ बहुविकल्पीय रुचिकर चित्रात्मक प्रश्नों का समावेश किया गया है जोकि किसी भी धर्म विशेष से समबन्धित न होकर पूरी तरह एक मानव के जीवन में नैतिक मानवीय मूल्यों को धारने की आवश्यकता को दर्शाते है। परीक्षा की एक खास विशेषता यह है कि यह परीक्षा परीक्षार्थी अग्रेजी एवं हिन्दी किसी भी माध्यम में दे सकते हैं व परीक्षा देने के उपरांत तुरन्त अपना परिणाम व ई-सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। यही नहीं वैश्विक स्तर पर मानवता अपना कर चरित्रवान बनने का संदेश प्रसारित करने हेतु सजनों इस परीक्षा को पूरी तरह नि:शुल्क रखा रखा गया है तथा टॉप हजार विजेताओ को लैपटाप, टेबलेट, स्मार्टफोन, टी0वी, ई-गेजेटस व अन्य आकर्षण इनाम इत्यादि प्रदान करने का प्रावधान रखा गया है।

हालाँकि ट्रस्ट गत तीन वर्षो से इस परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन करता आया है व इससे लाभान्वित हो लगभग ३० लाख बच्चों व परिवारिक सदस्यों में एक अच्छा इंसान बनने की उमंग जागरूक की है परन्तु पेपर वेसटेज को बचाने व डिजीटल इंडिया को प्रोत्साहित करने के लिए इस बार इस परीक्षा को पूरी तरह आनलाइन रखा गया है। इस संदर्भ में ट्रस्ट के इन तमाम प्रयासों की सराहना करते हुए देश के इले1ट्रानिकस एवं आई0 टी0 मंत्री माननीय एस0 एस0 आहलूवालिया जी ने कहा कि नैतिक चरित्र हमारे जीवन का बहुत महत्त््वपूर्ण पक्ष है। भौतिक समृद्धि चाहे हमें कितना ही सुख प्रदान 1यों न कर दे लेकिन नैतिक मूल्यों की धारणा से ही व्यक्ति उच्च व सही तरीके से जीवने जीने योग्य बनता है। अत:इनकी धारणा में ही परिवार, समाज एव राष्ट्र का उत्थान है। अपने इस संदेश में उन्होंने आगे देश की जनता एवं स्कूली छात्र-छात्राओं से इस परीक्षा को देकर अच्छा इंसान बनने की अपील की है।

यही नहीं परीक्षा के प्रयोजन व महत्ता को समझते हुए माध्यमिक शिक्षा निर्देशालय, पंचकूला व असम सरकार, ने तो असम राज्य व हरियाणा राज्य के विभिन्न जिला निर्देशकों को इस परीक्षा को आनलाइन समपन्न कराने के निर्देश समस्त स्कूलों में जारी कर दिए हैं। इस संदर्भ में यू0 पी, पंजाब, राज्यथान व उत्तराखंड शिक्षा निर्देशालयों को भी प्रार्थना पत्र भेजा गया है। आशा है कि आगामी सप्ताह तक हमें इन सब शैक्षणिक बोर्डो का सहयोग भी प्राप्त हो जाएगा।

आप सब की जानकारी हेतु अब तक लगभग १०० शहरों के लगभग ४०० से अधिक स्कूल, कोचिंग सेंटर व कालेजों के विद्यार्थी इस आनलाईन परीक्षा के अंतर्गत अपने आप को रजिस्टर कर चुके है व इनमें से लगभग पचास हजार लोग इस परीक्षा को दे चुके हैं। सजनों इससे पहले की कही ओर देर न हो जाए और आप अच्छा इंसान बनने के सौभाग्य को प्राप्त कर इनाम प्राप्ति से वंचित न रह जाए,

Posted by: | Posted on: June 15, 2018

सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा आयोजित मानवता-फेस्ट-2018

( विनोद वैष्णव ) | सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा अपने ही विशाल परिसर सतयुग दर्शन वसुन्धरा में मानवता -फेस्ट २०१८, का आयोजन किया गया। इस समारोह में देश के विभिन्न भागों से सैकड़ो की सं2या में युवा सदस्य पधार रहे हैं। फेस्ट के आयोजको के अनुसार यह फेस्ट भौतिकता के प्रसार के कारण, नैतिक रूप से पथभ्रष्ट हो रहे बाल-युवाओं को अध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर, सद्मार्ग पर लाने का एक अभूतपूर्व प्रयास है। सबकी जानकारी हेतु इस फेस्ट में खेल-कूद, मौज-मस्ती, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जूमबा, योगा, पेंटिग प्रतियोगिता, पतंगबाजी, टेलन्ट हंट इत्यादि का भी समुचित प्रबन्ध किया गया है।

फेस्ट के आरंभ में ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने सब बाल युवाओं को आयोजित इस मानवता-फेस्ट के प्रयोजन के विषय में स्पष्ट करते हुए कहा कि यह फेस्ट हर इंसान को, आत्मिक ज्ञान के अभाव के कारण, अज्ञानवश धारण की हुई हर बुराई को छोडऩे व अपने अलौकिक स्वरूप में अटलता से स्थित रह, मनुष्यता अनुरूप गुणवान व निश्चयात्मक बुद्धि वाला इंसान बनाने हेतु आयोजित किया गया है ताकि इंसान प्रसन्नचित्तता व निर्लिप्तता से इस जगत में विचर सके और ए विध् सर्वरूपेण सफलता प्राप्त कर सबका कल्याणकारी सिद्ध हो सकें।

इस संदर्भ में सर्वप्रथम उन्होने सब बच्चों से प्रार्थना कि अज्ञानवश अब तक जो भी बुरे भाव-स्वभाव अपना चुके हो उसे त्याग दो 1योंकि यह बुरे भाव ही मानस के अन्दर विकार पैदा करते हैं और बुरे कर्मों का आधार बनते हैं। यहाँ विकार का अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होने कहा कि विकार वे दोष हैं जिनके कारण किसी वस्तु का रूप-रंग बदल जाता है और वह खराब होने लगती है। अन्य श4दों में विकार या बुराई मन में उत्पन्न होने वाला वह प्रबल प्रभाव या वृत्ति है जिसके परिणामस्वरूप इंसान के स्वभाव में दोष या बिगाड़ उत्पन्न हो जाता है और वह उपद्रवी बन अपने मन की शांति भंग कर बैठता है। इस तरह इस लापरवाही के कारण वह भ्रमित व भ्रष्ट बुद्धि हो सहजता से राग-द्वेष आदि में फँस जगत के भ्रमजाल में उलझ जाता है और फिर उसी का होकर रह जाता है। इस तरह अपने वास्तविक अविनाशी अस्तित्व को भूल वह मिथ्याचारी बन जाता है। उन्होने कहा कि यह जानने के पश्चात् अब बुरे से अच्छा इंसान यानि दुराचारी से सदाचारी बनने का संकल्प लो। इस हेतु विवेकशील बनो यानि भले-बुरे का ज्ञान रखने वाले बुद्धिमान इंसान बनो, सद्गुणी बनो यानि नैतिक दृष्टि से अच्छे आचरण करने वाले निर्दोष व धर्मात्मा इंसान बनो तथा आत्मिक ज्ञानी बनो। श्री सजन जी ने बच्चों को स्पष्ट किया कि ऐसा करने पर ही आप कलुकाल की विकृत विकिरणों के दुष्प्रभाव से बचे रह सात्विक वृत्ति, स्मृति व बुद्धि वाले इंसान बन उच्च बुद्धि, उच्च ख़्याल कहला सकते हो। यहाँ सात्विक प्रकृति वाले इंसान की विशेषता बताते हुए उन्होने कहा कि ऐसा स्थिर मन-चित्त वाला बुद्धिमान इंसान इस जगत में जितने भी रूप हैं उसे प्रकृति का ही विभक्त रूप मानते हुए कभी भी किसी प्रभाववश अपना मूल गुण नहीं छोड़ता और सबके प्रति सजन भाव रखता है। इस प्रकार वह जगत को देखते-समझते व उसमें अकत्र्ता भाव से विचरते हुए सदा विचार, सत-जबान एक दृष्टि, एकता, एक अवस्था में बना रहता है और उसके लिए आत्मबोध कर ह्मदय सचखंड बना सत्य धर्म के निष्काम मार्ग पर चलते हुए परोपकार कमाना सहज हो जाता है।

अंतत: उन्होंने बच्चों से कहा कि इस तथ्य के दृष्टिगत सात्विक आहार-विचार व व्यवहार अपनाओ। कदाचित् राजसिक व तामसिक आहार व विचारों का सेवन मत करो। न ही माँसाहार, मद्यपान तथा नशीले पदार्थों का सेवन करने की लत में फँसो और न ही अश्लील विचार अपनाओ। ऐसा इसलिए 1योंकि प्रकृति विरूद्ध ऐसे आहार-विहार का सेवन करने से शरीर की स्वाभाविक वृद्धि एवं विकास क्रिया में तो अवरोध उत्पन्न होता ही है

साथ ही साथ शारीरिक अंगों में शिथिलता, रोग, आलस्य, जड़ता आदि भी पनप जाते हैं। इसी तरह यह मानसिक रूप से इन्सान की सोचने समझने की शक्ति को विकृत कर मन को अचेतन बनाते हैं व बुद्धि का सर्वनाश कर देते हैं। यही नहीं इनके अधिक प्रयोग से नाड़ीजाल व हारमोन्स का संतुलन भी बिगड़ जाता है। इस तरह यह शरीरस्थ नसों को मुरदा बना उनमें विष फैलाने का काम करते हैं और अत्याधिक नींद ला इन्सान को घोर तामसिक वृत्ति वाला इंसान बनाते हैं। उन्होने बच्चों से कहा कि अगर हम चाहते हैं कि हमसे ऐसी भूल न हो तो आत्मिक ज्ञान प्राप्त कर सात्विक आहारी व विचारी बनो और इस तरह निर्विकारी बन सद्-व्यवहारी कहलाओ और अपनी सर्वोत्कृष्टता सिद्ध करो।